*एकतरफा खालीपन—


 *एकतरफा खालीपन—


कोई सफ़र तो चलता है भला

अकेले दम पर चलने तक,

एक दिशा से छोड़ दिया तो,

दौड़ता है-क्या-अंत तक?


एक हाथ से बजाने वाली ताली की गुंजारा,

बस एक बार, और होती ख़त्म।


सूने घर में गूँजने वाला खुशियों का हो-हल्ला,

पल भर में ही होता ख़त्म।


एक तरफ से बढ़ने वाले हिंडोले की मंज़िल,

धीरे-धीरे होती ख़त्म।


एक ओर से निभाया जाने वाला सच्चा रिश्ता,

अनजाने में होता ख़त्म।


किसी बात पर अकेले हँसने-

वाला बनता है पगला,

आम शोक पर अकेले रोने-

वाला बनता है बावला।


कोई किसी पे मर भी जाता,

भले दूसरा परवाह न करता,

ऐसा रिश्ता कुछ दिन रहता,

और फिर भी ख़तम हो जाता।


एक ओर से हो तो बड़प्पन 

वह नाता भी होता ख़तम,

और हो तो नगण्य मान,

वह संबंध में भी नहीं चलन।


—दुल्कान्ति समरसिंह—DS

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