रिश्तों का सच।

 

रिश्तों का सच ।

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गरीबी में: 

     जब कोई पति गरीब होता है, तब पत्नी के 'पतिव्रता धर्म' का सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।


बीमारी में: 

      जब कोई पत्नी बीमार पड़ती है, तब पति के 'पत्नीव्रत धर्म' का सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।


बंटवारे में: 

जायदाद बंटते समय भाईचारे के साथ-साथ मातृत्व और पितृत्व का भी सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।


बुढ़ापे में: 

      जब मां-बाप वृद्ध होते हैं, तब उन्हें अपने लिए मातृ-पितृ भक्ति का सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।

     

उलझन में: 

       जब खुद को कोई उलझन होती है, तो दोस्ती का सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।


ताकत और पैसे में: 

       जब किसी को सत्ता और संपत्ति मिलती है, तभी इंसान का सच्चा स्वरूप दिखाई देता है।

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✍️ दुल्कान्ति समरसिंह ═𝐃𝐒═

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