* उल्टी - पल्टी दुनिया *

नाम जैसा है वैसा काम करेंगे,

वाम हाथ का खेल है यह ध्यान रखेंगे।

 

आदमी गरीब है,

उसका नाम "अमीर" है

"प्रकाश" नाम का बंदा, 

काले रंग का है।

 

"राजा" "राजा" कहता है, 

वह एक रंक है।

गांव में "गोपाल" है 

वह गौ से ख़ौफ़ है 


अगर खोलता है तो बकवादी मुख अपना, 

"सत्य" का तजुर्बा है मुख से झूठ बोलना। 


नखरे, गपशप करता, 

बेचैनी से रहता 

कहीं नहीं वह टिकता 

उसे भी "शांत" कहता।


"अशोक" भी, कभी-कभी 

शोक करता है फिर भी 

"विनोद" भी खुशी नहीं 

दुःखी बनाता है सभी।


मानो वह "लता" नहीं रेंगने वाली,

किसी के सामने नहीं झुकने वाली।


"रीता" के पास हैं बहुत सारी साड़ी,

और बहुत कीमती है उसकी गाड़ी। 


"अरुण", धूप में गया तो बजाओ ताली,

उसके रोग का नाम है अर्धकपाली।


जिसका नाम "रानी" है, 

पति कंगाली,

"जनक" है वह बिन बच्चों है जंजाली।


"रूपवती" है एक बदसूरत नारी, 

"देवेंद्र" का चेहरा बिल्कुल भी आसुरी। 


"शीतल" का क्रोध कभी नहीं उतरता,

उसको देख बादल भी राख हो जाता।


"कांति" का तो अंग-अंग खिला ही नहीं,

चेहरे पर कभी नूर मिला ही नहीं।


"यामिनी" रात को डर से कांपती रहती,

"नयनसुख" की आँखें नहीं दिखाई देतीं।


नाम जैसा है वैसा काम करेंगे,

वाम हाथ का खेल है यह ध्यान रखेंगे। 

नाम भला करके शुभ काम करेंगे 

राम राम आपसे भगवान मिलेंगे।

  -दुल्कान्ति समरसिंह-

(यहाँ बताए गए नाम किसी व्यक्ति से संबंधित नहीं हैं।)

 

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