-साज़गार-


 -साज़गार-


ए सुस्मिता तेरी सहिष्णुता

ग्रहणशीलता बढ़ती-

हुई मुझे सिद्धिदाता बना दी,

तू मेरी सृष्टिकर्ता बन गई।


दुनियावाले क्या कहेंगे 

यह तो परवाह नहीं है फिर भी,

नैतिकता से अब मैं तेरा बन 

जाऊँगा कहीं भी।


मैं तेरा सागवान बनूँगा

तू मेरी सांत्वना बनेगी।


ए सुस्मिता मेरी वैयक्तिकता तू

तहस-नहस कर दे,

तू मेरी सहूलियत रख दे।

मुझे सागरसुता ला दे।

जो मुझे साग-पात समझे,

उसे भी साज़गार कर दे। —𝐃𝐒.

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