'कथनी से करनी भली'।


 एक

मुख..

एक

जुबान...

और

दो हाथों के

पीछे छुपी हुई

बड़ी कहानी है,

'कथनी से करनी भली'।

—दुल्कान्ति समरसिंह—[DS]

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