सूनापन


 ।। सूनापन ।।

ओ मेरे प्यारे अकेलापन,

खुशियां ढूंढता है यह जीवन।

अगर जुड़ीं तो 

फिर गायब हैं,

अंत में मिलता है सूनापन।


जहाँ विचारों का वास नहीं होता,

वहाँ प्रश्नों का भार नहीं आता।


जहाँ ख़्यालों के मेघ नहीं चलते,

वहाँ सवालों के दाह नहीं जलते।


अगर करे तो मेरा मन,

छोड़ दूँगा सारा धन।

और चलूँगा वृंदावन,

ले के रहूँगा वीरासन।


सारी दुनिया में हैरान,

लोग नहीं जैसे भगवान।

सबसे अच्छा है वीरान,

ढूँढने में उत्तम निर्वाण।

   —दुल्कान्ति समरसिंह— ═𝐃𝐒

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