*आँसू—


 *आँसू—


आँखें भी देख नहीं पातीं आँसू  

इन्हीं आँखों से ही बहता आँसू

रातों भर पलकों पर मचल-मचल कर,

आँखों को ही रुलाता है ना आँसू।


भूत काल से आता आँसू,

भूत काल को जाता आँसू

टूट जाने से तमन्ना दिल की,

चुप से बहने वाला आँसू।


जन्म से मृत्यु तक आँसू,

बाहर और अंदर आँसू।

जातिभेद नहीं मानता है हर—

आँखों में रहता है आँसू।


ख़्वाब जैसा है आँसू,

बिन पैमानों के आँसू।

मुस्कानों के पीछे छुप गए,

सागर से ज्यादा आँसू।

—दुल्कान्ति समरसिंह-

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