*पहले प्यार का किस्सा*


 *पहले प्यार का किस्सा*


यह साठ-सत्तर की कहानी,

जो हम दोनों की होने वाली,

है छोटी सी मुन्नी जैसी…


आँख खुलने से भी 

पहले ही,

सो जाने ना दो इसे…


ख्यालों के पिंजड़े में

तड़प-तड़पकर,

मर जाने ना दो इसे।


छाई घटाओं की, 

परछाँइयों के 

पीछे ठुमकने दो इसे…


हरे-भरे मैदानों में उड़तीं

तितलियों को

पकड़ने दो इसे।


कृष्ण कन्हैया की 

मुरली की

आवाज़ सुनने दो इसे…


कृष्णगंगा में 

जलविहार से 

ख़ुश तो होने दो इसे।


राधा-कृष्ण की 

प्रेम कहानी 

बना के इसे 

रख लो 

तुम...


रामचंद्र के

इस किस्से की,

सीता बन कर 

रह लो

तुम…


यह साठ-सत्तर की कहानी,

मत बना दो

एक

पल की तुम…


यह अछूता प्यार

अब

इनकार हुआ तो—

जब,

पुनीत ना होगा

तब…!!

—दुल्कान्ति समरसिंह-(DS)

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