—काउ सर्जिकल (Cow Surgical)—
स्कूल से घर लौटने के बाद, कुमार के बड़े बेटे श्याम ने अपनी माँ से कहा,
"आपको पता है माँ?.. आज हमारी अँग्रेज़ी टीचर ने सभी बच्चों से कहा कि छठी कक्षा के 'बी' सेक्शन में बहुत खाली जगह है। तुम लोग वहाँ जाकर बैठो, मुझे प्रिंसिपल साहब ने किसी ज़रूरी काम से बुलाया है।... तो हमने भी ऐसा ही किया। उस वक्त उस क्लास में दूसरे अँग्रेज़ी टीचर पढ़ा रहे थे। उन टीचर ने सभी छात्रों से कहा कि अपनी-अपनी माँ का नाम अँग्रेज़ी में बताओ।… जब टीचर ने पूछा,
"और बताओ प्रभात बेटा, तुम्हारी माँ का नाम क्या है? अँग्रेज़ी में बताओ।"
तभी प्रभात ने कहा,
"My mother's name is Cow Surgical."
जब श्याम ने यह बात बताई, तो कुमार की पत्नी ने हैरानी से पूछा,
"क्या कहा? काउ सर्जिकल?... यह क्या बकवास है? ..प्रभात, अब तुम ही बताओ, मेरा नाम यह है क्या?.."
प्रभात ने मासूमियत से कहा,
"हाँ माँ, नहीं तो और क्या?.. टीचर ने ही तो बताया था कि माँ का नाम हिंदी में नहीं, अँग्रेज़ी में बताओ। इसलिए मैंने आपके नाम का अँग्रेज़ी अनुवाद कर दिया।.."
"मुझे तो वह अँग्रेज़ी-वँग्रेज़ी पता नहीं, पर तुमने 'काउ सर्जिकल' नाम कैसे बना लिया?.." माँ ने पूछा।
"अरे माँ, आपका नाम कौशल्या है ना!... यह नाम तो हिंदी का है। अगर मैं यही नाम बता देता, तो मुझे टीचर से खूब डाँट पड़ती। इसलिए मैंने इसे अँग्रेज़ी में बदल दिया।.. अँग्रेज़ी में गाय को 'कौ' कहते हैं और 'शल्य' चिकित्सा को 'सर्जिकल' कहते हैं। तो मैंने जो कहा, वह बिल्कुल ठीक है ना माँ?..."
"अरे बाप रे! तुम भी ना,... अपने पापा जैसे ही बुद्धू बनते जा रहे हो।.. भला नामों का भी कोई अँग्रेज़ी में अनुवाद करता है गधे?.."
कुमार की पत्नी ने हँसते हुए कहा।
तभी कुमार भी वहाँ आ पहुँचा। उसने पूछा,
"कियों कौसलिया, तुम मुझे बुद्धू कियों कह रही हो?"
"क्योंकि तुम एक नंबर के बुद्धू हो!"
पत्नी ने चिढ़ाया।
"अरे कौसलिया, तुम हमेसा मुझे ऐसा कियों कहती हो?.. परिवार के मुखिया को इस तरह नीचा दिखाना सही नहीं है। ..देखो, किया मैंने कभी तुम्हारे साथ ऐसा व्यवहार किया है?.. नहीं ना! ..मुझिसे बस एक ही ग़लती हुई थी, वह भी हमारी सादी के पहले दिन! ..तुमने उस दिन से आज तक मेरे साथ कभी अच्छा व्यवहार नहीं किया। अब पुरानी बातों को छोड़ भी दो ना कौसलिया।"
"छोड़ दूँ? हुह!.. कैसे छोड़ दूँ? मेरे सिवाय अगर कोई और औरत मेरी जगह होती, तो आज तुम्हें छोड़कर जा चुकी होती।"
कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा,
"अरे कौसलिया, यह इतनी सी तो बात थी। सादी के पहले दिन मैंने तुमसे पूछा था,
— 'सुनो कौसलिया, अगर मैं अचानक इस दुनिया से अलविदा कह दूँ, तो तुम क्या करोगी?' ..
तब तुमने कहा था—
'अगर ऐसा हुआ, तो मैं अपनी छोटी बहन के साथ बाकी की ज़िंदगी बिताऊँगी।'
और फिर तुमने मुझसे पूछा था—
'अगर अचानक मैं इस दुनिया को छोड़कर चली जाऊँ, तो तुम क्या करोगे?'
तब मैंने भी यही तो कहा था कि—
'मैं भी वही करूँगा!'
कुमार की यह बात सुनकर उसकी पत्नी ने सिर पीट लिया और कहा,
"इसीलिए तो मैंने तुम्हें महाबुद्धू कहा था!"
—दुल्कान्ति समरसिंह।

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